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नेशनल जूनियर - गौरव की हेट्रिक ,वैशाली की छठी जीत

15/10/2016 -

बिहार के गौरव की लगातार ऊंचे वरीय खिलाड़ियों के खिलाफ जीत की हेट्रिक और वैशाली के रिकॉर्ड छठवीं जीत के साथ ही गोदावरी नदी के किनारे बसे राजमुंदरी ,आंध्र प्रदेश में 46वीं राष्ट्रीय जूनियर शतरंज प्रतियोगिता (बालक ) और 31 वीं राज्य जूनियर शतरंज स्पर्धा (बालिका ) अब अपने बेहद रोमांचक दौर में पहुँच गयी है । भारत के समस्त राज्यो से चयनित होकर आए  करीब सवा दो सौ खिलाड़ी भारतीय टीम में चयनित होने के लिए 11 चक्रो में से 9 चक्र खेल चुके है । बालिका वर्ग में तमिलनाडु की शीर्ष वरीयता प्राप्त इंटरनेशनल मास्टर आर वैशाली नें अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करते हुए 1.5 अंको की बढ़त के साथ दो राउंड पूर्व ही लगभग खिताब पर कब्जा जमा लिया है और ऐसे में अब सिर्फ वो ही खुद को रोक सकती है । 9 राउंड के बाद जंहा वैशाली 8 अंक बनाकर सीधी बढ़त पर है जबकि बंगाल की अर्पिता ,तमिलनाडु की प्रियंका ,ओड़ीसा की रुतुंभरा और साइना 6.5 अंको के साथ सयुंक्त दूसरे स्थान पर है । बालक वर्ग में गौरव 7.5 अंको के साथ सीधी बढ़त पर है आंध्र प्रदेश के कृष्णा तेजा ,महाराष्ट्र के शैलेश द्रविड और ओड़ीसा के सिद्धांत मोहपात्रा 7 अंको के साथ दूसरे स्थान पर चल रहे है इस रिपोर्ट में मैंने फीडे के रेटिंग सिस्टम पर भी कुछ बाते रखी है पढे ये लेख !!

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पार्श्वनाथ दिल्ली ओपन :: शतरंज महाकुम्भ :: एक यात्रा

12/10/2016 -

किसी भी देश में , किसी भी स्थान पर , किसी भी खेल को आगे बढ़ाने में जितना योगदान कोई एक अच्छा आयोजन कर सकता है उतना शायद कोई अन्य नहीं कर सकता । शतरंज जैसे खेल में कोई आयोजन करना अब भी कोई आसान कार्य नहीं है और अब से 14 साल पहले तो बिलकुल ही आसान ना था , ना तो खेल आज जितना प्रशिद्ध था और ना ही खिलाड़ियों तक जानकारी पहुंचा पाना आसान काम ऐसे में भारत की राजधानी  दिल्ली में शुरुआत हुई एक प्रतियोगिता की जिसकी इनाम राशि रखी गयी कुल 3 लाख आज उसी प्रतियोगिता के सिर्फ एक वर्ग का प्रथम पुरुष्कार 4 लाख रुपेय है और कुल 51,51,000/-रुपेय !! जब प्रतियोगिता की शुरुआत हुई उस समय दिल्ली में कोई ग्रांड मास्टर ना था और इसी प्रतियोगिता नें खेल को ऐसा बढ़ावा दिया की आज दिल्ली परिमार्जन ,अभिजीत ,श्रीराम ,वैभव ,सहज ,आर्यन ,तनिया जैसे नामी ग्रांड मास्टरों का शहर कहलाता है । भारतीय शतरंज के इस  आयोजन के 15 संस्करण के मौके पर अंतर्राष्ट्रीय निर्णायक धर्मेंद्र कुमार की यह शानदार रिपोर्ट पढे ..

छोटा बच्चा जान के ना कोई आँख दिखाना रे !!समझे ना !!

10/10/2016 -

जब मैं 11 साल का था एक सामान्य बच्चे की तरह उछल कूद करना ,किसी ओर के घर जाके टीवी देखना मेरा मुख्य शौक था तभी मैंने एक फिल्म देखी थी नाम था मासूम !! उसमें देखा एक गीत मुझे बहुत पसंद था कल रात 11 वर्ष के दुनिया के सबसे युवा इंटरनेशनल मास्टर और सबसे खास- एक भारतीय प्रग्गानंधा का खेल देखकर और फिर आईएम सागर शाह का लेख पढ़कर मुझे वही गाना अनायास ही बार बार याद आ रहा है..छोटा बच्चा जान के ना कोई आँख दिखाना रे ,अक्ल का कच्चा जान के हमको ना समझाना रे.. भारत में हमेशा से प्रतिभाए मौजूद रही है और जरूरत रहती है पारखी नजरों की जो उन्हे सामने ला सके । आरबी रमेश भारतीय शतरंज के लिए एक वरदान की तरह है जो एक के बाद एक शानदार खिलाड़ी इस देश को दे रहे है । वाकई प्रग्गानंधा आपके भोलेपन , आपकी निडरता और ज्ञान देखकर एक बात बिलकुल साफ है आने वाला समय एक बार फिर भारत में बने इस खेल में भारतीयो के स्थान को और मजबूत करेगा ! आईएम सागर शाह के लेख से ही हिन्दी में इसे लिख रहा हूँ ..पढे इसे  !!

क्या हरिका की जीत विराट कोहली के शतक से कम है !?

09/10/2016 -

आज सुबह जब मैंने समाचार पत्रो को देखा तो मैंने देखा भारत के प्रमुख हिन्दी दैनिक में प्रकाशित मेरे लेख में हरिका के ठीक बाजू विराट कोहली की शतक मारने के बाद की तस्वीर थी ,मन में सवाल यह आया की क्या हारिका की जीत शतक से भी ज्यादा बड़ी खबर नहीं है ? या कम से कम उसके बराबर तो है ही ? फिर क्यूँ ये अन्य समाचार पत्रो में नहीं है ? तो मैंने तकरीबन 3 घंटे ऑनलाइन लगभग देश के सभी समाचार पत्रो को छान मारा । अँग्रेजी के न्यूज़ पेपर तो फिर भी छोटी सी सही पर खबर निकालने में समर्थ दिखे पर हिन्दी समाचार पत्रो में खबर ढूँढना लगभग नामुंकिन सा था । विराट हर जगह विराट थे कंही मुख्य पेज में तो कंही खेल पन्ने के लगभग 60 % से 80 % हिस्से में ।  सिर्फ ओलंपिक ही अन्य खेलो के लिए होता है मतलब 4 साल में एक बार  बाकी समय उन्हे प्रोत्साहित करना तो दूर उन्हे जगह देना भी मुश्किल है ? खैर मेरा उद्देश्य आलोचना करना नहीं जागरूकता फैलाना है ! शतरंज पर वापस आते है और देखे कैसे जीती हारिका !!

भोपाल ओपन 2016 आमंत्रण - हिंदुस्तान का दिल देखो

07/10/2016 -

ठंड की आहट के बीच  गुनगुनी धूप के मजे के साथ भोपाल ओपन टूर्नामेंट का चौंथा संस्करण आगामी 20 दिसंबर से हिंदुस्तान के दिल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित किया जा रहा है । अपने शानदार इंतजामों के लिए जाना जाने वाला यह टूर्नामेंट अब खिलाड़ियों की गुड लिस्ट में स्थान बना चुका है । 1,00,000/- रुपेय के प्रथम पुरुष्कार के साथ कुल 4,15,000 /- रुपेय के कुल पुरुष्कार राशि वाली इस प्रतियोगिता के पहले तीनों संस्करण बेहद सफल रहे है । प्रतियोगिता भोपाल के प्रसिद्ध टीटी नगर स्टेडियम में खेली जावेगी और खिलाड़ियों के रुकने का इंतजाम भोपाल के एमएलए रेस्ट हाउस में किया गया है । प्रतियोगिता का समापन 25 दिसंबर को होगा और आप चाहे तो उसके बाद होने वाली सर्दियों की छुट्टी का आनंद आप मध्य प्रदेश भ्रमण करके भी उठा सकते है !शतरंज खेल के इस उत्सव में आप सभी को आमंत्रित करता यह विनम्र लेख ..

इयान नें जीता ताल मेमोरियल ,आनंद तीसरे स्थान पर

06/10/2016 -

उम्र 26 वर्ष ! देश रूस ! विश्व के 11वे नंबर के खिलाड़ी बने इयान नेपोमनियाचटचि  नें ताल मेमोरियल का खिताब जीत लिया है ।  विश्व शतरंज में रूस का दबदबा तो हमेशा से रहा पर पिछले कुछ वर्षो में रूस के बाहर के खिलाड़ियों नें ही  विश्व शतरंज पर अपना दबदबा रखा है यंहा तक की दुनिया की सबसे बेहतर औसत वाली विश्व नंबर 1 टीम रूस 2002 के बाद से शतरंज ओलंपियाड़ नहीं जीत सका है , पिछले एक दशक में कास्पारोव के जाने के बाद से सिर्फ  क्रामनिक , पीटर ,ग्रीसचुक ही नाम रूस के नाम पर हमे याद आते है , कर्जकिन भी यूक्रेन से रूस आए । खैर मैं यह सब आपको इसीलिए बता रहा हूँ क्यूंकी लगता है रूस को इयान नेपोमनियाचटचि के रूप में अब एक नया बड़ा सितारा मिला है जो विश्व स्तर पर चमकने के लिए तैयार है । भारत के पाँच बार के विश्व विजेता भारत के विश्वनाथन आनंद के लिए भी एक प्रकार से प्रतियोगिता अच्छी साबित हुई और रेटिंग में कम पर महत्वपूर्ण 3 अंको की बढ़त के साथ आनंद तीसरे स्थान पर रहे अंतिम तीन चक्र में उनके मैच ड्रॉ रहे ..

ताल मेमोरियल -R-3-4-5 - वापसी की रोचक दास्तान !!

01/10/2016 -

ताल मेमोरियल के पिछले तीन चक्र आनंद के लिए तीन अलग अलग परिणाम लेकर आए , एक ड्रॉ ,एक हार और एक जीत लेकिन साथ ही साथ नजर आया अनुभव और वापसी का जबरजस्त जज्बा , पाँच बार के विश्व विजेता विश्वनाथन आनंद अब शायद अपने परिणाम की चिंता करना छोड़ वापस अपने खेल में वह सब कुछ प्रयोग करना चाहते है जो वो शायद वे 10 साल पहले करते थे आनंद नें एक बार मुझसे कहा था की मैंने बहुत पहले ही खेल में यह सीख लिया था की आपको पिछला खराब मैच भूलना होगा और मैंने इसे अपनी आदत बना लिया ! आज का मैच आनंद के लिए कुछ ऐसा ही रहा वो सिसिलियन रोसोलिमों में शुरुआत से ही बेहतर थे और फिर अंत में उनका खेल कुछ महान ताल को समर्पित रहा एक मोहरे के बदले 4 प्यादे ! आगे आप खुद समझदार है देखे यह लेख और गिरकर उठने की यह कला भी अपनाए !

ताल मेमोरियल -आनंद ने ममेद्यारोव को हराया ,संयुक्त बढ़त पर

28/09/2016 -

मद्रास टाइगर नींद से जाग चुके है !! भारत के लिए आज ताल मेमोरियल से अच्छी खबर आई है भारत के पाँच विश्व चैम्पियन विश्वनाथन नें अजरबैजान के ग्रांड मास्टर ममेद्यारोव को बेहद ही सधे हुए अंदाज में पराजित कर एक आत्मविश्वास देने वाली जीत दर्ज की पहले राउंड में अनीश गिरि से अच्छा बचाव कर ड्रॉ खेलने वाले आनंद आज भी काफी अच्छी चाले चलते हुए नजर आए , अच्छी बात ये है की वो सही समय पर बेहतर चाल ढूंढ पा रहे है जो उनके अच्छी लय को दिखाती है । अनीश गिरि भी अब जीत दर्ज करने लगे है और कैंडिडैट टूर्नामेंट के बाद उन्होने अपनी शैली में और सुधार किया है ,बाकी सभी मैच ड्रॉ रहे  दो राउंड के बाद भारत के आनंद , नीदरलैंड के अनीश और रूस के इयान नेपोमनियाचटचि 1.5 अंक बनाकर सयुंक्त बढ़त पर चल रहे है । 

बहुत- बहुत धन्यवाद ! महान लेखक मार्क द्वोरेत्स्की !!

27/09/2016 -

किसी के दुनिया से विदा लेने के बाद उनके प्रति सम्मान प्रकट करने का एक ही तरीका है उनके किए गए कार्यो से सीखना । मार्क द्वोरेत्स्की नें अपने लेखन और शोध कार्य से शतरंज को एक नए स्तर पर पहुंचाया उनसे सीखकर ना जाने कितने बेहतर खिलाड़ी बने तो वहीं उनसे सीखकर उनके शोध कार्य को देखकर लेखको और प्रशिक्षको की एक पूरी नयी पीढ़ी तैयार हुई । इनके लेखन कुछ खास बाते उनकी किताबों को बेहद लोकप्रिय और महत्वपूर्ण बनाती है । एंडगेम मेनुएल उनकी सर्वश्रेस्ठ कृति रही । अगर आप शतरंज के अच्छे खिलाड़ियों में आते है तो आइए उसी में से आज कुछ याद करते है और अगर आपने शतरंज अभी सीखना शुरू किया है या किसी को सिखा रहे है तो इस लेख से आपको मार्क द्वोरेत्स्की की महानता का अंदाजा हो जाएगा और यह किताब आपके खेल के स्तर को सुधारने के लिए कितनी जरूरी है आप जान पाएंगे । आइये उनकी किताब में से कुछ सीखकर उन्हे श्रद्धांजलि देते है ..

महान शतरंज प्रशिक्षक ,लेखक मार्क द्वोरेत्स्की नहीं रहे

26/09/2016 -

कुछ लोग अपने जीवन में खुद के द्वारा हासिल की गयी ऊंचाइयों के लिए जाने जाते है  और ऐसे लोगो को हम सफल कहते है ,तो कुछ बिरले अपना सारा जीवन किसी खास उद्देश्य के लिए समर्पित कर देते है ,ये लोग दूसरों को सफल बनाने के लिए कार्य करते है ऐसे लोग महान कहलाते है । 

विश्व शतरंज जगत स्तब्ध है ,महान मार्क द्वोरेत्स्की जिन्हे सदी का सबसे बेहतरीन शतरंज प्रशिक्षक ,लेखक और शतरंज वैज्ञानिक भी कहा जाए तो गलत नहीं होगा , अब इस दुनिया में नहीं रहे , आज मॉस्को में उनका 69 वर्ष की आयु में देहांत हो गया अपना सारा जीवन शतरंज को समर्पित कर देने वाले मार्क ने खेलने की बजाय प्रशिक्षण को वरीयता दी और विश्व भर में उनकी किताबों को पढ़ना जैसे हर खिलाड़ी के लिए अनिवार्य समझा जाने लगा । आज शतरंज जगत ने आज अपना एक अनमोल हीरा खो दिया । ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे । भाव भीनी श्रद्धांजली । 

मेरा लक्ष्य सिर्फ ग्रांड मास्टर बनना नहीं है -आर्यन चोपड़ा

25/09/2016 -

"मेरा लक्ष्य सिर्फ ग्रांड मास्टर बनना नहीं है उससे आगे भी जाना है  " ऐसा कहना है मात्र 14 वर्ष की आयु वाले  वर्तमान में विश्व के सबसे युवा ग्रांड मास्टर बने आर्यन चोपड़ा का वे सबसे कम उम्र में ग्रांड मास्टर बनने वाले भारत के दूसरे  खिलाड़ी  है . उन्होने सिर्फ 61 टूर्नामेंट खेलकर ही ग्रांड मास्टर की उपाधि पायी है  यह बात उनकी उपलब्धि को बेहद ही खास बनाती है बेहद ही नम्र स्वभाव के आर्यन  अपने माता-पिता के लिए 2900 रेटिंग का आंकड़ा छूना चाहते है । इस छोटी सी उम्र में भी अपने भारत देश से उन्हे बेहद लगाव है और तिरंगे की मौजूदगी उन्हे अच्छा खेलने के लिए प्रेरित करती है और ये बात इशारा करती है की भारत को आने वाले समय के लिए एक चमकता सितारा मिल चुका है ताल और फिशर के खेल से बेहद प्रभावित आर्यन विश्व शतरंज में अपनी गहरी छाप छोड़ना चाहते है और इसके लिए जो बाते आवश्यक है वो उनमे मौजूद भी है । पढे और देखे उनका पूरा इंटरव्यू ..

ग्रांड मास्टर स्वप्निल ने जीता मलेशियन ओपन 2016

20/09/2016 -

 मलेशिया में चल रहा शतरंज का शानदार महोत्सव अभूतपूर्व सफलता के साथ सम्पन्न हुआ । विश्व के दिग्गज ग्रांड मास्टरो के बीच शारीरिक रूप से अक्षम पर मानसिक तौर पर होसले से भरपूर खिलाड़ियों की प्रतिभागिता नें प्रतियोगिता को मानवीयता के उच्च स्थान पर स्थापित किया ।  एशिया के प्रतिष्ठित शतरंज प्रतियोगिताओ में से एक मलेशियन ओपन का 13वां खिताब भारत के युवा ग्रांड मास्टर स्वप्निल धोपाड़े नें अपने नाम कर लिया साथ ही वह ऐसा करने वाले दूसरे भारतीय ग्रांड मास्टर बन गए । भारत के नजरिए से यह प्रतियोगिता बेहतरीन साबित हुई और भारत के खिलाड़ियों का दबदबा पुरुष्कार वितरण के दौरान भी नजर आया । जंहा स्वप्निल विजेता बने तो आर्यन भारत के नए ग्रांड मास्टर , नारायन श्रीनाथ तीसरे स्थान पर रहे ।  भारत की शीर्ष महिला खिलाड़ी हम्पी नें जिस अंदाज में स्वास्थ्य खराब होने के बाद भी अपना सर्वश्रेस्ठ देने को कोशिश की वह एक सीखने योग्य आदत है ।हम्पी प्रतियोगिता की महिला वर्ग पुरुष्कार की विजेता रही ! 

मलेशिया ओपन स्वप्निल -श्रीनाथ बढ़त पर ,आर्यन बने ग्रांड मास्टर

16/09/2016 - खेल सिर्फ उनके लिए ही नहीं जो इसमें सर्वश्रेस्ठ है यह उनके लिए भी है जो क्षमता ना सही हौसला भी रखते है ऐसा ही कुछ नजारा है मलेशियन ओपन का । भारत के ग्रांड मास्टर स्वप्निल धोपड़े और अंतर्राष्ट्रीय मास्टर नारायण श्रीनाथ उज्बेकिस्तान के फीडे मास्टर नोदिरबेक के साथ 13वें मलेशिया चैस फेस्टिवल ,कुआलालम्पूर मलेशिया में चल रहे दातों आर्थर तान अंतर्राष्ट्रीय ग्रांड मास्टर शतरंज प्रतियोगिता के छह चक्रो के बाद सयुंक्त बढ़त पर चल रहे है । प्रतियोगिता की शीर्ष वरीयता भारत की नंबर महिला शतरंज खिलाड़ी कोनेरु हम्पी को दी गयी है । 2152 औसत रेटिंग वाली इस प्रतियोगिता में 8 ग्रांड मास्टर ,19 अंतर्राष्ट्रीय मास्टर समेत कुल 13 देशो के कुल 100 खिलाड़ी भाग ले रहे है जिसमें लगभग आधे 48 टाइटल खिलाड़ी है । चौकने वाली बात ये है की मेजबान मलेशिया से ज्यादा खिलाड़ी भारत से इस प्रतियोगिता में भाग ले रहे है मलेशिया से जंहा 24 तो भारत के 33 खिलाड़ी इस प्रतियोगिता में भाग ले रहे है । प्रतियोगिता के आयोजन में आयोजको नें शानदार इंतजाम किए है । मुख्य प्रतियोगिता के अलावा मलेशिया चैलेंज , रैपिड ,ब्लिट्ज ,और बच्चो के लिए आयु वर्ग के लिए विशेष आयोजन भी साथ में आयोजित किए जा रहे है ।

ओलंपियाड R -10-11- कुछ नें पदक जीते तो बाकी ने दिल !!

14/09/2016 -

अपने देश का प्रतिनिधित्व करना ,कोई लक्ष्य बनाना और उसके लिए जी जान से जुट जाना , प्रतिभाशाली साथियों का  साथ होना ,एक अनुभवी और योग्य प्रशिक्षक का होना , समय आने पर अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करना ,दबाव के लम्हो में भी खुद पर भरोसा रखना ,खेल की हर चाल का आनंद उठाना ,हार जीत की भावना से परे अपने प्रतिद्वंदी का भी सम्मान करना और अपना सर्वश्रेस्ठ देने की कोशिश करना ।  अगर  परिणाम को एक तरफ रखकर हम सोचे तो इस  पैमाने पर 176 देशो से आए वह सभी 2245 खिलाड़ी ही बाकू के विजेता है ,पदक तो सिर्फ यह बताने के लिए है की किसने सबसे ज्यादा मेहनत की पर इससे जो नहीं जीते उनका महत्व कम नहीं हो जाता ,उन सभी खिलाड़ियों के एक साथ एक जगह होने से जो विश्व भर की विभिन्न संस्कृतियों का आपस में मेलजोल हुआ ,जिस प्रेम और मुस्कान का आदान प्रदान हुआ वह अमूल्य है और दरअसल सही मायनों मैं बाकू नें इन सभी पैमानो पर अपना नाम सर्वश्रेस्ठ ओलंपिक के तौर पर सभी के दिलो में अंकित कर लिया , अंतिम दो चक्रो में भारतीय टीम नें दो ड्रॉ खेले और हम पुरुष वर्ग में चौंथे और पांचवे स्थान पर रहे । ये भी क्या कम है !!भविष्य हमारा है !!

ओलंपियाड R- 9 - भारत के लिए कंही खुशी -कंही गम

12/09/2016 -

42वें विश्व शतरंज ओलंपियाड में शुरुआत से ही भारतीय पुरुष टीम नें गज़ब का खेल दिखाया है पर 9वे चक्र में भारतीय महिला टीम नें देश को गर्व करने के पल दिये और  पिछले दो मैच जीतकर रफ्तार पकड़ ली है । हरिका ,तनिया और सौम्या नें अच्छा खेल दिखाते हुए जीत दर्ज की कुल मिलाकर  बाकू में आज का दिन भारत के लिए खुशियाँ और गम दोनों लेकर आया ,भारतीय महिला टीम नें नीदरलैंड को 3-1 से पराजित कर जैसे अपनी आखिरी ट्रेन पकड़ ली और एक बार फिर से पदक की दौड़ में लौट आई जबकि पुरुष टीम का जायका उक्रेन की टीम नें बिगाड़ दिया और दो चक्र पूर्व बढ़त पर चल रही भारतीय टीम छठे स्थान पर सरक गई अगला चक्र विश्व नंबर एक टीम रूस से है और भारत के लिए स्थति "करो या मरो " की आ चुकी है अगर पदक जीतना है तो रूस की दीवार भेदनी ही होगी ,और शायद आज टीम को विदित या हरिकृष्णा से बड़ी जीत की जरूरत है । वंही महिला टीम के पास आज उक्रेन से हिसाब बराबर करने को मौका होगा !

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