आनंद -कार्लसन -चैस बेस और हिन्दी का शतरंज सफर -1
14/11/2016 -25 अक्टूबर 2013 की बात है रात को तकरीबन 2 बज रहे थे । मैंने कुछ उम्मीद के साथ यूं ही चैस बेस की मुख्य वेब पेज को खोला और मेरी खुशी का ठिकाना ही ना रहा पहली बार हिन्दी को अंतर्राष्ट्रीय शतरंज वैबसाइट में प्रकाशित किया गया था वह मेरे लिए बेहद ही खास लम्हा था मुझे खुद को अभिव्यक्त करने का कुछ माध्यम मिल गया था , यह शायद वैसी ही खुशी ही जैसे कोई छोटा बच्चा बोलना सीख जाता है मतलब अपनी बात अपने घर वालों से कह सकता है कुछ घंटो पहले ही मेरे दिमाग में एक विचार आया था क्या हिन्दी में शतरंज के बारे में लेख लिखे जा सकते है और मात्र कुछ ही घंटो में चैस बेस के संस्थापक फ़्रेडरिक फ्रीडेल ने मेरे सपने को सच कर दिया था ! यह एक रोमांचक लम्हा था मेरे जीवन का पढे हिन्दी का ये सफर